
नई दिल्ली: ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा अयोध्या में विराजमान रामलला की मूर्ति को लेकर दिए गए कथित बयान के बाद विवाद गहरा गया है। उनके बयान पर विभिन्न हिंदू संगठनों और संत समाज ने कड़ी आपत्ति जताते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
विवाद उस समय शुरू हुआ जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर रामलला की मूर्ति को “काला पत्थर” बताया। इस बयान के सामने आने के बाद कई धार्मिक संगठनों ने इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का अपमान बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
हिंदू संगठनों का कहना है कि इस तरह की टिप्पणियां धार्मिक भावनाओं को आहत करती हैं और समाज में तनाव पैदा कर सकती हैं। कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी किए गए हैं और संबंधित पुलिस अधिकारियों को शिकायत सौंपकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।
वहीं, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थकों का कहना है कि उनके बयान को संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किया जा रहा है। उनका दावा है कि शंकराचार्य ने मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा और धार्मिक प्रक्रिया से जुड़े विषय पर अपनी धार्मिक राय व्यक्त की थी, जिसे गलत तरीके से प्रचारित किया जा रहा है।
फिलहाल इस मामले में पुलिस की ओर से एफआईआर दर्ज होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। शिकायतों के आधार पर मामले की जांच की जा रही है और संबंधित वीडियो की भी पड़ताल की जा रही है।
